‘राम मंदिर आंदोलन से जुड़े संतों व विद्वानों को ट्रस्ट में शामिल करें’

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अयोध्या में राम मंदिर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। देश की जनता ने इसे सहजता से स्वीकार लिया है। न्यायालय ने राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट गठन करने का आदेश दिया है। सरकार को चाहिए कि राम मंदिर आंदोलन में जिन संत-महात्माओं, विद्वानों और संगठनों ने हिस्सा लिया था उनको ट्रस्ट में शामिल करें। अयोध्या में जब भी राम मंदिर का निर्माण र्का शुरू हो उसमें जो पत्थर और ईंट जुटाई गई थी उसका प्रयोग अवश्य किया जाय। क्यों कि इसमें देश की जनता की आस्था और भावनाएं जुड़ी हुई है। यह बातें रविवार को ज्योतिषपीठ के पूर्व शंकराचार्यों की जयंती के उपलक्ष्य में मनाए जाने वाले आराधना महोत्सव के विषय में जानकारी देने के दौरान स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने मीडिया से कही।

बताया कि आराधना महोत्सव दो दिसम्बर से 10 दिसंबर तक अलोपीबाग आश्रम में होगा। महोत्सव के दौरान श्रीमद्भागवत कथा दोपहर दो बजे से शाम छह बजे तक होगी।कथा वाचक महंत रामानंद होंगे। छह दिसम्बर को भगवान श्री राधामाधव का पाटोत्सव  एवं जगद्गुरु शंकराचार्य ब्रह्मलीन स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती की जयंती महोत्सव। सात दिसंबर को  गीता जयंती एवं जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी विष्णुदंवानंद सरस्वती की जयंती। नौ दिसंबर को श्री राम जानकी मंदिर का पाटोत्सव, दस दिसंबर को जगद्गुरु शंकराचार्य ब्रह्मलीन स्वामी शांतानंद सरस्वती का जयंती महोत्सव एवं आराधना। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. गिरीश चंद्र त्रिपाठी की अध्यक्षता में सम्मान समारोह होगा। आराधना महोत्सव में श्रीमद्भागवत

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